सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया
जमानियां। एसडीएम और तहसीलदार कार्यालयों में आउटसोर्सिंग या प्राइवेट कर्मियों की तैनाती से संवेदनशील राजस्व, पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत मामलों की गोपनीयता भंग होने का खतरा एक बेहद गंभीर और वास्तविक समस्या है। प्रशासनिक कामकाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं। बताया जाता है। कि आउटसोर्सिंग या प्राइवेट कर्मियों के द्वारा अदालती फैसलों, भूमि विवादों, और जांच रिपोर्टों से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज आसानी से लीक या कॉपी किए जा सकते हैं। इसके साथ ही पासवर्ड प्राइवेट ऑपरेटरों को पता चल जाने का डर बना रहता हैं। प्राइवेट कर्मी बिना रिकॉर्ड के कोई भी फेरबदल कर सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारी के तहसील अध्यक्ष इजहार खान, वीरेंद्र कुमार, भाजपा व्यापार मंडल के जिला युवा उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, नारायण दास चौरसिया आदि सहित लोगों ने दुर्भावनापूर्ण है। कि एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय में सरेआम प्राइवेट कर्मी सरकारी कागजातों की देखरेख कर रहे है। जिम्मेदार अधिकारी भी उन्हीं से सबसे सामने कार्य ले रहे है। उन्होंने कहा कि अवैध कमाई के लालच में कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति या विरोधी पक्ष को किसी भी फाइलों के बारे जानकारी दे सकते है। जब की इसके लिए बचाव और कानूनी उपाय जिम्मेदार अधिकारी को करनी चाहिए। पूर्व गाजीपुर जिलाधिकारी (DM) रहे मंगला प्रसाद द्वारा निर्देश दी गई। कि एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय प्राइवेट और आउटसोर्सिंग कर्मचारी से सरकारी फाइलों जैसे जमीनी विवाद, राजस्व से कार्य नहीं लेंगे। अन्यथा जांच करते समय दोषी पाए जाने पर कार्यवाही किया जाएगा। लेकिन पूर्व जिलाधिकारी के आदेश का कोई असर दिखाई नहीं दी। इजहार खान, मुन्ना गुप्ता, वीरेंद्र कुमार ने बताया कि संवेदनशील कार्यों (जैसे- राजस्व, शस्त्र लाइसेंस, और गोपनीय जांच) में प्राइवेट व्यक्तियों की संलिप्तता से आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठ रहा है। गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए प्राइवेट कर्मियों को तत्काल सरकारी कार्यालय हटाया जाए। क्योंकि सरकारी कार्यालयों में आम जनता की निजी जानकारी (मोबाइल नंबर, भूमि रिकॉर्ड, बैंक डिटेल्स) लीक होने की बराबर डर बना रहता है। सरकारी दफ्तरों में प्राइवेट कर्मचारी से तो यह कानूनन अपराध है।