कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट
वाराणसी। मनोवैज्ञानिक निर्देशन परामर्श एवं अनुसंधान केंद्र, मनोविज्ञान विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला श्रृंखला ‘मनोसंवाद: परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य– विशेषज्ञ दृष्टिकोण और पद्धतियां’ के दूसरे दिन शिक्षा एवं परामर्शन पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता क्षेत्रीय मनोवैज्ञानिक केंद्र की क्षेत्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. बनानी घोष ने मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास एवं भावनात्मक सुदृढ़ता पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही समाज एवं राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच एवं संवाद कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
जवाहर नवोदय विद्यालय, रायगढ़ के काउंसलर डॉ. धनंजय कुमार मिश्रा ने विद्यार्थियों में बढ़ते शैक्षणिक दबाव, परीक्षा तनाव एवं करियर संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समय रहते उचित परामर्श मिलने से विद्यार्थी मानसिक तनाव से बाहर निकलकर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। केंद्रीय विद्यालय, बीएचयू के स्टूडेंट काउंसलर मंधाता मिश्रा ने विद्यालयी जीवन में काउंसलिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों के भावनात्मक एवं व्यवहारिक विकास के लिए शिक्षक, अभिभावक एवं काउंसलर के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने किशोरावस्था से जुड़ी समस्याओं एवं उनके समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने कहा कि ‘मनोसंवाद’ कार्यशाला विद्यार्थियों को व्यवहारिक काउंसलिंग, भावनात्मक संतुलन एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम आयोजन सचिव डॉ. मुकेश कुमार पंथ ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। संचालन विकास विश्वकर्मा एवं जाह्नवी गुप्ता ने किया। इस अवसर पर प्रो. रश्मि सिंह, डॉ. प्रतिभा सिंह, डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहीं।