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गढ़ा मंडला की धरती गवाह बनी है आदिवासी समाज के उलगुलान की

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गढ़ा मंडला की धरती गवाह बनी है आदिवासी समाज के उलगुलान क जहाँ हजारों आदिवासियों के बीच जमीन पर बैठकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तिरु. तुलेश्वर हीरासिंह मरकाम ने ऐलान नहीं, चुनौती साफ शब्दों में कहा कि गोंडवाना की धरती गढ़ा मंडला है, थी और रहेगी। जो भी इसे बदलने का सपना देख रहा है, वह याद रखे इतिहास कागज से नहीं, खून-पसीने और बलिदान से लिखा जाता है। जिस दिन गढ़ा मंडला का नाम बदलने की कोशिश हुई, उस दिन सिर्फ नाम नहीं बदलेगा, मंडला की फितरत बदल दिया जायेगा और यह बदलाव किसी अफसर, मंत्री या सत्ता के इशारे पर नहीं, आदिवासी समाज की एकजुट ताकत तय करेगी। यह आंदोलन नहीं, स्वाभिमान की हुंकार है। यह विरोध नहीं, चेतावनी है। गढ़ा मंडला से छेड़छाड़ मतलब पूरे गोंडवाना से टकराव,अब फैसला सत्ता को करना है इतिहास के साथ खड़ा होना है या गोंडवाना के लोगों का आक्रोश की सामना… कमलेश गोंड

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