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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुर्वेदिक कक्ष में ताला बंद रहता है। मरीजों को नहीं मिलता इलाज की लिए दवाएं

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सलीम मंसूरी की रिपोर्ट

जमानियां। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए योगी सरकार द्वारा अधिकारियों को समय-समय पर आवश्यक दिशा निर्देश प्राप्त होते रहते हैं। इसके बावजूद कस्बा बाजार स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित आयुर्वेदिक कक्ष में आयुर्वेदिक दवा के अभाव में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। स्वास्थ्य केंद्र में आयुर्वेदिक इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बिना दवा के अभाव में लौटने को मजबूर हो रहे है। कार्यरत फार्मासिस्ट सुभाष गुप्ता को नगसर स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया है। आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र में लगभग एक साल से दवा के अभाव में ताला बंद हैं। आयुर्वेदिक के मरीज आते हैं। लेकिन आयुर्वेदिक कक्ष के दरवाजे पर ताला लटकता हुआ देखकर मरीज मायूस हो जाते हैं। और विभाग पर उदासीनता का आरोप जताते हुए। दवा और इलाज अभाव होने से वापस लौट जाते हैं। फिर इलाज के लिए आसपास मौजूद निजी नर्सिंग होम का सहारा लेते हैं। सही मायने में आयुर्वेदिक मरीजों को इस अस्पताल में इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को चिकित्सकों ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है। जिस कार्य के लिए सरकार से चिकित्सक हर महीने लाखो रुपए वेतन ले रहे हैं। वही कार्य करने में शर्म संकोच महसूस करते हैं। मरीजों की सेवा करने के लिए सरकार द्वारा चिकित्सकों के ऊपर प्रति वर्ष करोड़ों रुपए वेतन के रूप में खर्च किया जाता है। इसके बावजूद चिकित्सक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करने नहीं। आते बल्कि निजी नर्सिंग होम में इलाज करने में गौरवान्वित महसूस करते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार के नगराध्यक्ष इजहार खान ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित आयुर्वेदिक कक्ष में लगभग एक साल से दवाएं नहीं रहती है। यहां तक कि फार्मासिस्ट सुभाष गुप्ता को बेवजह स्वास्थ्य केंद्र नगसर भेज दिया गया। जब की वहां पर भी आयुर्वेदिक दवाएं नहीं के बराबर है। सरकार को चाहिए कि आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध कराएं। ताकि मरीजों को उसका लाभ मिलता रहे।

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