वाराणसी दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट। शहर के नरिया क्षेत्र में बने पावर हाउस की हालत को लेकर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया यह पावर हाउस अभी तक विधिवत रूप से शुरू भी नहीं हुआ, लेकिन परिसर की चारों तरफ की दीवारें जर्जर होकर गिरने के कगार पर पहुंच गई हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि सरकारी धन से कराए गए निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं, तो उसका खामियाजा आखिरकार जनता और सरकारी खजाने को ही भुगतना पड़ता है।लोगों का सवाल है कि जब पावर हाउस का उद्घाटन तक नहीं हुआ, तो निर्माण के कुछ समय बाद ही इसकी दीवारें जर्जर कैसे हो गईं? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की गई थी? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण किया था?हालांकि, कमीशन लेकर टेंडर देने या अधिकारियों की जेब में पैसा जाने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण में मानकों का पालन हुआ था या नहीं और सरकारी धन का सही इस्तेमाल किया गया या नहीं।अब देखना होगा कि बिजली विभाग और संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और पावर हाउस की जर्जर दीवारों को लेकर जिम्मेदारी किसकी तय होती है।