सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। पर्यावरण संरक्षण के निबंध में हम पर्यावरण की सुरक्षा के उपाय खोज तो रहे है। इसके लिए जागरूक भी होना पड़ेगा। उक्त जानकारी अमन शांति एकता इति के सरपरस्त नेसार खान वारसी ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण के सबसे मुख्य कारण तेल, कोयला जैसे ईंधन जलने से निकले पदार्थ, कारखाने व इंडस्ट्रीज़ से निकला कचरा, जंगलों की आग, प्लास्टिक कचरा, बढ़ता शहरीकरण, न्यूक्लियर वेस्ट, केमिकल खाद व कीटनाशक, घटते जंगल, गाड़ियों का धुआँ, खनन (mining) आदि हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए घर की खाली जमीनी, बालकनी , छत पर पौधे लगाया जाना अति आवश्यक है। इसके साथ आर्गेनिक खाद, गोबर खाद या जैविक खाद का उपयोग करना ही पर्यावरण को बचाया जा सकता है। और कपड़े के बने झोले-थैले लेकर खरीदारी करने निकलें पॉलिथीन-प्लास्टिक का इस्तेमाल करना बंद किया जाए। इसके अलावा खिड़की से पर्दे हटायें, दिन में सूरज की रोशनी से काम चलायें। और
सोलर पैनल लगवायें, सोलर कुकर में खाना बनायें, इसके साथ ही लीक हो रहे नल ठीक करवायें। शॉवर लेने की बजाय बाल्टी से नहायें। बल्ब की जगह पर सीएफ़एल या एलईडी बल्ब लगायें। आस-पास जाने के लिए बाइक की बजाय साइकिल, या पैदल जाया जाए। इसके साथ ही लोगों को बर्थडे, त्योहार पर पौधे गिफ्ट करना चाहिए।मकान के कमरे से निकलने पर टीवी, लाइट, फैन, एसी बंद करने के लिए जागरूक बनना होगा। कपड़ा धोने से बचे पानी को पौधों में डाल दें या जमीन पर धोएं,प्लास्टिक बोतल की जगह कांच, स्टील या तांबे की बॉटल प्रयोग करें। और शाकाहारी बनें, मांसाहार का सेवन कम करें या बंद करने पर जोर दें। मंजन या शेविंग करते समय मग में पानी लेंना चाहिए। बल्कि नल न चलायें। प्लास्टिक कप, प्लेट की जगह मिट्टी के कुल्हड़, कागज या पत्ते के बने प्लेट अपनायें। और प्लास्टिक के खाली डब्बों में सामान रखें या पौधे लगायें। खान ने कहा कि गाड़ी के पहिये में हवा चेक करवाते रहें। इससे पेट्रोल बचता है। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का उपयोग करना चाहिए। नेसार खान वारसी ने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा और पर्यावरण सुधार का सबसे व्यापक कानून है। इसके अंतर्गत केंद्र सरकार के पास पर्यावरण संरक्षण के लिए तुरंत प्रभाव के निर्णय लेने की शक्ति भी होती है। अधिनियम 23 मई 1986 को पारित किया गया था। और 19 नवंबर 1986 से लागू हुआ