दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट
*वाराणसी* धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में वाराणसी पुलिस कमिश्नर *मोहित अग्रवाल* ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। उन्होंने जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों और चौकियों में व्यापक स्तर पर फेरबदल किया है, जिसका उद्देश्य जनमानस में सुरक्षा की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करना है।
दो साल का बेमिसाल सफर: विश्वास और विकास की पुलिसिंग
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल का वाराणसी में अब तक का *दो साल का कार्यकाल* बेहद प्रभावशाली रहा है। उनके नेतृत्व में काशी की पुलिसिंग ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। उनके कार्यकाल की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार रहीं:
जनता का भरोसा:* पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी को कम करने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य किए गए।
नई कानून व्यवस्था:* भीड़ नियंत्रण से लेकर वीआईपी मूवमेंट और घाटों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक और नए प्रोटोकॉल लागू किए गए।
*भ्रष्टाचार पर नकेल:* महकमे के भीतर पारदर्शिता लाने के लिए समय-समय पर कड़े फैसले लिए गए।
अब नई कमान की चर्चा: क्या बदलेगा काशी का ‘कप्तान’
जहाँ एक ओर मोहित अग्रवाल के सुधारों की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक गलियारों और आम जनता के बीच अब *वाराणसी के नए पुलिस कप्तान* (कमिश्नर) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।” मोहित अग्रवाल जी ने सुरक्षा का जो मानक स्थापित किया है, वह काबिले तारीफ है। लेकिन अब शहर की बदलती जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए, जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि काशी की कमान अब किस नए चेहरे को सौंपी जाएगी।
*प्रमुख फेरबदल के मायने*
हाल ही में थानों और चौकियों पर किए गए तबादलों को इस बदलाव की आहट के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह फेरबदल आगामी चुनाव या त्योहारों के मद्देनजर कानून व्यवस्था को और अधिक ‘सजग’ बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
अब देखना यह होगा कि क्या शासन मोहित अग्रवाल के कार्यकाल को और विस्तार देता है या जल्द ही वाराणसी को एक **नया ‘कप्तान ‘** मिलेगा जो विकास और सुरक्षा के इस पहिये को आगे बढ़ाएगा।