चंदौली भारतवर्षीय गोंड आदिवासी महासभा के तत्वाधान में परशुरामपुर अवस्थित मुख्यालय पर बाबा साहेब डा.भीमराव अम्बेडकर जी के 135 वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई
महासभा के अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र गोंड जी ने बाबा साहेब के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि बाबा साहेब का निर्देश ‘शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो’ यह हर समय प्रासंगिक रहा है और रहेगा। बाबा साहेब अम्बेडकर ने 3 अक्टूबर 1954 को मेरा जीवन दर्शन में आशा व्यक्त की है कि “स्वतंत्रता, समता और बंधुता” सामाजिक ध्येय एक दिन अवश्य बनेगा। हम सबका कर्तव्य है कि बाबा साहेब के इस आशा को साकार करने का प्रयास अवश्य किया जाय। भारत के संविधान की उद्देश्यिका में भी स्वतंत्रता समता और बंधुता है। बगैर बंधुता को विकसित किए भारत को एक सम्प्रभुत्व सम्पन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य नहीं बनाया जा सकता और न ही समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित कराया जा सकता है।
कार्यक्रम को मां. प्यारेलाल गोंड, घुरहू प्रसाद, श्रीकृष्ण गोंड, सुरेश प्रसाद, शीतला प्रसाद, रविशंकर गोंड, सुदामा, हरिश्चंद्र आदि लोगों ने माल्यार्पण कर बाबा साहेब अम्बेडकर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीकृष्ण गोंड और अध्यक्षता डॉ. उमेश चन्द्र गोंड ने किया।