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महापर्व में महालापरवाही: शिवपुर में पंचकोशी यात्रियों के लिए बंद मिले धर्मशालाओं के ताले

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दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट

तपती धूप में पेड़ की छांव खोजने को मजबूर श्रद्धालु

*शिवपुर* ।। धर्म नगरी काशी में चल रही तीन वर्षीय पुरुषोत्तम मास (मलमास) की पावन ‘पंचकोशी यात्रा’ का आज तीसरा दिन है। कल यानी बुधवार को यात्रा का चौथा दिन होगा, जिसके चलते शिवपुर स्थित चौथे पड़ाव पर पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रशासन और नगर निगम के दावे पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। शिवपुर स्थित चौथे पड़ाव पर यात्रियों की सुविधाओं के नाम पर केवल बदइंतजामी का आलम पसरा हुआ है। ​शिवपुर पड़ाव पर स्थित प्रमुख धर्मशालाओं— जैसे गोकुलचंद धर्मशाला और नगर निगम रामलीला मैदान के समीप स्थित धर्मशाला— पर नगर निगम ने अभी तक ताले जड़ रखे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस तपती धूप और भीषण गर्मी में नगर निगम ने यात्रियों के ठहरने के लिए जो अस्थाई टीन शेड लगाए हैं, उनके नीचे न तो ठंडे पानी (वाटर कूलर) की व्यवस्था है और न ही पंखे चालू हैं। ऐसी स्थिति में ये टीन शेड आग उगल रहे हैं। आश्रय न मिलने के कारण पंचकोशी यात्री भीषण गर्मी में पेड़ की छांव और स्थानीय मंदिरों के चबूतरे पर शरण लेने को मजबूर हैं। महामंडलेश्वर ने जताई कड़ी नाराजगी, व्यवस्थाओं की निंदा की

​शिवपुर स्थित चौथे पड़ाव पर पहुंचे महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी जी महाराज ने प्रशासन की इस घोर लापरवाही पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और इसकी कड़े शब्दों में निंदा की,बातचीत करते हुए महाराज जी ने कहा: ​”3 वर्ष में एक बार आने वाले इस महापर्व को हमें एक उत्सव की तरह मनाना चाहिए, लेकिन यहाँ की बदइंतजामी देखकर मन अत्यंत दुखी है। हमारा दर्द यह है कि जब यह दिन 3 साल में एक बार आता है, तो हम इसे पर्व की तरह क्यों नहीं मनाते? प्रशासन की सुस्ती के कारण श्रद्धालु इस भीषण गर्मी में त्रस्त हैं।”

​स्वामी जी ने आगे बताया कि कंदवा धर्मशाला में पंचकोशी यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था तो ठीक थी, लेकिन वही भीमचंडी धर्मशालाओं में ठहरने का कोई उत्तम प्रबंध नहीं था और वहां चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ था। महाराज जी ने इस संबंध में जिलाधिकारी (DM) से भी फोन पर शिकायत की थी,पंचकोशी यात्रा का धार्मिक महत्व?

​बदइंतजामी पर अपनी पीड़ा व्यक्त करने के साथ ही महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी जी महाराज ने पंचकोशी यात्रा के अलौकिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया:

​पापों से मुक्ति: मान्यता है कि काशीवास (काशी में रहने) मात्र से ही मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। परंतु, यदि तीर्थ क्षेत्र काशी में रहते हुए भूलवश कोई पाप हो जाए, तो उसका नाश या विमोचन केवल और केवल ‘काशी की पंचकोशी यात्रा’ से ही संभव है।

​बाबा विश्वनाथ करते हैं पापों का शमन: पंचकोशी यात्रा के दौरान भी यदि अनजाने में किसी श्रद्धालु से कोई त्रुटि या पाप हो जाए, तो स्वयं भगवान काशी विश्वनाथ उस पाप को हर लेते हैं। काशी विश्वनाथ की इस पावन परिक्रमा को करने से जीव के समस्त पापों का समूल नाश हो जाता है। प्रशासन अब भी मौन

​आज यात्रा के तीसरे दिन ही जब व्यवस्थाएं दम तोड़ चुकी हैं, तो कल चौथे दिन जब पैदल यात्रियों का रेला शिवपुर पहुंचेगा, तब स्थिति और भी विकट हो सकती है। अब देखना यह है कि संतों की नाराजगी और यात्रियों की इस दुर्दशा को देखने के बाद क्या नगर निगम की नींद खुलती है या श्रद्धालु इसी तरह धूप में भटकने को मजबूर रहेंगे।

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