सलीम मंसूरी की रिपोर्टजमानियां। विकास खंड अंतर्गत एवं दिलदारनगर मार्ग स्थित सन शाइन पब्लिक स्कूल में वृक्षारोपण की शुभारंभ विद्यालय संस्थापक सर्वानंद सिंह के कर कमलों के द्वारा किया गया। इसके बाद विद्यालय अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह प्रबंधक अमित कुमार एवं वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा पौधरोपण किया गया। बताया जाता है। की वन महोत्सव भारत में मनाया जाने वाला एक वार्षिक वृक्षारोपण उत्सव है। जो हर साल 1 से 7 जुलाई तक आयोजित किया जाता है। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने, वनों की कटाई को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस दौरान सर्वानंद सिंह ने बताया कि वन महोत्सव का महत्व और उद्देश्य पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़ हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। तथा कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं। और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करते हैं। विद्यालय अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि मानसून का सही समय यह है। की जुलाई का महीना मानसून की शुरुआत का प्रतीक होता है। जो नए पौधों के रोपण जीवित रहने और तेजी से बढ़ने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। वृक्षारोपण अभियान को लेकर प्रबंधक अमित कुमार सिंह बताया कि एक पेड़ माँ के नाम जैसी पहल चलाई जाती है। जो लोगों को अपनी माँ और प्रकृति के प्रति सम्मान जताने के लिए पौधे लगाने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम यह अभियान इस वर्ष वन महोत्सव के दौरान पूरे देश में व्यापक रूप से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। वन विभाग के द्वारा लाखों पौधे लगाने के लक्ष्य रखे गए हैं। इस अभियान के तहत वन रेंज पर पौध भंडारा 500 पौधों का वितरण एवं पौधों की बारात एवं पौधों का रोपण कार्यक्रम में वन के अधिकारी JSP वर्मा,RFO के द्वारा आम, ढाक प्लास, जामुन, रुद्राक्ष महोगनी, कटहल, शीशम, गुटेल, सहजन, अमरूद, पीपल, गूलर, बरगद और सहजन जैसे औषधीय और छायादार देशी पौधे लगाने को प्राथमिकता दी गई है। सिंह ने बताया कि एक पेड़ माँ के नाम’ और वन महोत्सव के तहत हो रहे वृक्षारोपण की झलक देखने को मिल रहा है। सन शाइन पब्लिक स्कूल परिसर में एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 200 सौ पौधे लगाए गए। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह, प्रबंध निदेशक अमित कुमार सिंह, निर्देशिका श्रीमती पूजा सिंह, प्रधानाचार्य ए.के.बघेल सहित आदि शिक्षक मौजूद रहे।