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वैदिक पंचांग ~* 🌞

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🌞 *~ वैदिक पंचांग ~*

 

🌤️ *दिनांक – 31 दिसम्बर 2025*

🌤️ *दिन – बुधवार*

🌤️ *विक्रम संवत 2082*

🌤️ *शक संवत -1947*

🌤️ *अयन – दक्षिणायन*

🌤️ *ऋतु – शिशिर ॠतु*

🌤️ *मास – पौष*

🌤️ *पक्ष – शुक्ल*

🌤️ *तिथि – द्वादशी 01 जनवरी रात्रि 01:47 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*

🌤️ *नक्षत्र – कृत्तिका 01 जनवरी रात्रि 01:29 तक तत्पश्चात रोहिणी*

🌤️ *योग – साध्य सुबह 09:13 तक तत्पश्चात शुभ*

🌤️ *राहुकाल – दोपहर 12:24 से दोपहर 01:44तक*

🌤️ *सूर्योदय – 07:15*

🌤️ *सूर्यास्त – 05:33*

👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*

🚩 *व्रत पर्व विवरण – पुत्रदा एकादशी, (भागवत)*

💥 *विशेष – द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

 

🌷 *पुत्रदा एकादशी*

➡️ *30 दिसम्बर 2025 मंगलवार को सुबह 07:50 से 31 दिसम्बर प्रातः 05:00 तक एकदशी है।*

💥 *विशेष – 30 दिसम्बर 2025 मंगलवार को पुत्रदा एकादशी (स्मार्त) एवं 31 दिसम्बर 2025 बुधवार को पुत्रदा एकादशी (भागवत)*

👉🏻 *31 दिसम्बर 2025 बुधवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*

🙏🏻 *पुत्रदा एकादशी (पुत्रप्राप्ति की इच्छा से इसका व्रत करनेवाला पुत्र पाकर स्वर्ग का अधिकारी भी हो जाता है ।)*

🙏🏻 *स्त्रोत – लोककल्याण सेतु – नवम्बर २०१६ से*

 

🌷 *वास्तु शास्त्र*

*वास्तु में पुराने कैलेंडर लगाए रखना अच्छा नहीं माना गया है। ये प्रगति के अवसरों को कम करता है। इसलिए, पुराने कैलेंडर को हटा देना चाहिए और नए साल में नया कैलेंडर लगाना चाहिए। जिससे नए साल में पुराने साल से भी ज्यादा शुभ अवसरों की प्राप्ति होती रहे।*

*अगर सालभर अच्छे योग और फायदे चाहते हैं तो घर में कैलेंडर को वास्तु के अनुसार ही लगाएं।*

👉🏻 *वास्तु अनुरुप कहां लगाएं कैलेंडर*

*कैलेंडर उत्तर,पश्चिम या पूर्वी दीवार पर लगाना चाहिए। हिंसक जानवरों, दुःखी चेहरों की तस्वीरोंवाला ना हो। इस प्रकार की तस्वीरें घर में नेगेटिव एनर्जी का संचार करती है।*, *पूर्व में कैलेंडर लगाना बढ़ा सकता हैं प्रगति के अवसर- पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य हैं , जो लीडर शिप के देवता हैं। इस दिशा में कैलेंडर रखना जीवन में प्रगति लाता है। लाल या गुलाबी रंग के कागज पर उगते सूरज, भगवान आदि की तस्वीरों वाला कैलेंडर हो।*

*उत्तर दिशा में कैलेंडर बढ़ाता है सुख-समृद्धि- उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है। इस दिशा में हरियाली,फव्वारा, नदी,समुद्र, झरने, विवाह आदि की तस्वीरों वाला कैलेंडर इस दिशा में लगाना चाहिए। कैलेंडर पर ग्रीन व सफेद रंग का उपयोग अधिक किया हो।*

*पश्चिम दिशा में कैलेंडर लगाने से बन सकते हैं रुके हुए कई कार्य- पश्चिम दिशा बहाव की दिशा है। इस दिशा में कैलेंडर लगाने से कार्यों में तेजी आती हैं। कार्यक्षमता भी बढ़ती है। पश्चिम दिशा का जो कोना उत्तर की ओर हो। उस कोने की ओर कैलेंडर लगाना चाहिए।*

*कैलेंडर नहीं लगाना चाहिए घर की दक्षिण दिशा में- घड़ी और कैलेंडर दोनों ही समय के सूचक हैं। दक्षिण ठहराव की दिशा है। यहां समय सूचक वस्तुओं को ना रखें। ये घर के सदस्यों की तरक्की के अवसर रोकता है। घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।*

*मुख्य दरवाजे से नजर आता कैलेंडर भी नहीं लगाएं- मुख्य दरवाजे के सामने कैलेंडर नहीं लगाना चाहिए। दरवाजे से गुजरने वाली ऊर्जा प्रभावित होती है। साथ ही तेज हवा चलने से कैलेंडर हिलने से पेज उलट सकते हैं । जो कि अच्छा नहीं माना जाता है।*

💥 *विशेष : अगर कैलेंडर में संतों महापुरुषों तथा भगवान के श्रीचित्र लगे हों,तो ये और अधिक पुण्यदायी और आनंददायी माना जाता है |*

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