कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट मऊ, दिनांक 29 मई अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया जी और आदिवासी कांग्रेस उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र जी के आह्वान पर मऊ जनपद के आदिवासी कांग्रेस जिला कमेटी के जिलाध्यक्ष विवेक कुमार गोंड , प्रदेश महासचिव एडो. बिमल प्रताप गोंड के नेतृत्व में भाजपा और आर.एस.एस. द्वारा ‘आदिवासी’ को ‘बनवासी’ पहचान में समेटने की कोशिश का कड़ा विरोध करते हुए गृहमंत्री अमित शाह का पूतला दहन किया गया। ज्ञात हो कि दिनांक 24 मई को दिल्ली के रामलीला मैदान में भाजपा द्वारा आयोजित ‘जनजातीय समागम’ में गृहमंत्री अमित शाह सहित अन्य वक्ताओं ने भी ‘बनवासी’ शब्द का प्रयोग किया था।
विरोध प्रदर्शन के दौरान डीजल, पेट्रोल और गैस के दामों में हो रही वृद्धि का भी कड़ा विरोध किया गया।
प्रेस वार्ता के दौरान मऊ जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव जी ने भी बनवासी शब्द का विरोध किया।
संविधान सभा में भी जयपाल सिंह मुंडा जी ने बनवासी और जंगली शब्द का कड़ा विरोध कियाथा और
उन्होंने तर्क दिया कि इन नामों ने आदिवासियों की गरिमा को कम किया, और उन्हें भारत के असली तथा मूल मालिकों के रूप में मान्यता देने के बजाय, केवल जंगलों के निवासी तक सीमित कर दिया। उन्होंने ‘आदिवासी’ शब्द के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया, क्योंकि इसमें ऐतिहासिक वैधता थी और यह ज़मीन पर उनके पारंपरिक अधिकार को रेखांकित करता था।
भारतीय जनता पार्टी और आर.एस.एस दोनों ही आदिवासी हितेषी नहीं है। ये लोग एक ओर आदिवासियों का नृत्य मंच पर करवाते हैं और दूसरी ओर उनके जल, जमीन और जंगलों के कार्पोरेट के हांथों सौंपते हैं।
विरोध प्रदर्शन में मऊ कांग्रेस और फ्रंटल के लोग उपस्थित रहे।