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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित बने डॉक्टरों/कर्मचारियों के सरकारी आवासों की स्थिति अत्यंत दयनीय है

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सलीम मंसूरी की रिपोर्ट

जमानियां। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित बने डॉक्टरों/कर्मचारियों के सरकारी आवासों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। जो झाड़-कबाड़, गंदगी और जीर्ण-शीर्ण इमारतों के कारण खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। रंगाई पोताई के अलावा मरम्मत के अभाव में तथा साफ-सफाई और प्रशासनिक अनदेखी से संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। समस्याएं और बदहाली के कारण रखरखाव का अभाव के साथ अक्सर सफाई व्यवस्था ठप होने से परिसर में झाड़-कबाड़ और कूड़ा-कचरा फैला रहता है। सरकारी आवास खंडहर होते जा रहे है। लाचार मजबूर स्वास्थ्य कर्मी आवास में रहने को लाचार है। बताया जाता है। कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित सरकारी आवास देखरेख के अभाव में खंडहर बनती जा रही हैं। और जिम्मेदार हाथ पर हाथ दिए बैठे है। जबकि रखरखाव के नाम पर धनराशि आता है। बुनियादी सुविधाओं की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों और अभिभावकों को काफी परेशान होना पड़ता है। गर्मी के मौसम में ठंडा पानी की सप्लाई और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। अगर परिसर में पालिका द्वारा लगाई गई है। तो पानी टंकी टूटी होने के कारण बंदर उसमें नहाते है। उसी गंदे पानी को पीने के लिए मरीज अजीज हो रहे है। जिसके चलते संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। पीने के पानी में भीषण गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है। जिससे मरीजों के लिए खतरा बना रहता है। इन समस्याओं के कारण मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में भारी कठिनाई होती है और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है। व्यापार मंडल के जिला उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, इरफान खान, आलोक शर्मा, त्रिलोकीनाथ चौधरी, अजीत चौधरी, वसीम अंसारी, सद्दाम आदि लोगों ने मुख्यचिकित्सा अधिकारी गाजीपुर का ध्यान आकृष्ट कराते हुए। बदहाल आवास की मरम्मत कराने के लिए मांग किया गया है।

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