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गैंगरेप में सहयोगी महिला आरोपित को मिली जमानत

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दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट

वाराणसी। गैंगरेप में सहयोग करने वाली महिला आरोपित को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) कुलदीप सिंह की अदालत ने रामगढ़, चंदवक (जौनपुर) निवासी आरोपिता किरन को एक लाख रुपए की एक जमानत एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार चौबेपुर थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता ने चौबेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि लगातार एक वर्ष से वह बलुआ, चंदौली निवासी प्रभाकर निषाद से बातचीत करती आ रही है। इस दौरान प्रभाकर निषाद ने उसके साथ शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाया। जिसमें उसकी सहयोगी आरोपिता किरन सिंह ने भी भरपूर सहयोग दिया, लेकिन जब पीड़िता ने उस पर शादी करने का दबाव बनाने लगी तो उसने इंकार कर दिया। इस पर 24 फरवरी 2026 को पीड़िता को महिला आरोपित किरन अपने साथ चंद्रावती बाजार ले गई, जहां से महिला आरोपित ने पांच लड़कों को फोन से बुलाया, जो पीड़िता को अपने साथ ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किए। उक्त बातें पीड़िता ने अदालत में अपने कलमबंद बयान में दर्ज कराया था। जिसके बाद चौबेपुर पुलिस ने पीड़िता के तहरीर पर किरन समेत अन्य लोगों के खिलाफ पीड़िता से गैंगरेप करने के मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपिता किरन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

अदालत में बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि प्रथम सूचना रिपोर्ट के पीड़िता ने केवल प्रभाकर निषाद पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया है, जबकि बाद विवेचना के दौरान गलत एवं असत्य तथ्यों के आधार पर उसका नाम प्रकाश में लाकर आरोपित बना दिया गया है। पीड़िता के परिवार वालों से उसके मायके वालों का मुकदमा का रंजिश है। इसी रंजिश के तहत पीड़िता ने अपने बयान में उसका नाम लेकर यह कहा है वह उसे चंद्रावती बाजार में छोड़कर चली गई, जबकि इसका कोई चश्मदीद साक्षी नहीं है। अदालत ने पत्रावली व साक्ष्यों के अवलोकन के बाद आरोपिता की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

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