राजेश दुबे की रिपोर्ट
वाराणसी: देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) एक बार फिर विवादों के घेरे में है. सूत्रों के मुताबिक, संस्थान में आउटसोर्स के जरिए होने वाली नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का आरोप लगा है. विश्वसनीय सूत्रों ने दावा किया है कि बिना किसी आधिकारिक नोटिफिकेशन या विज्ञापन के ही बैकडोर से भर्तियां की जा रही हैं, जिसमें कथित तौर पर ‘पदों की बोली’ लग रही है.
किन पदों पर है संकट का साया?
जानकारी के मुताबिक, यह कथित घोटाला मुख्य रूप से आउटसोर्सिंग के जरिए भरे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी स्तर के पदों से जुड़ा है. इसमें मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS), जनरेटर ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन, कारपेंटर, पलंबर कम कलर्क, और ऑफिस अस्सिटेंट जैसे पद शामिल हैं. ये ऐसे पद हैं जिन पर भर्ती के लिए आमतौर पर एक पारदर्शी प्रक्रिया और सार्वजनिक विज्ञापन की आवश्यकता होती है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यहां पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया है.
“सूत्रों के हवाले से”: लाखों की मांग, एक पद के लिए मोटी रकम
संस्थान के भीतर के सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उनके अनुसार, इन आउटसोर्सिंग पदों पर नियुक्ति पाने के लिए उम्मीदवारों से लाखों रुपये की मांग की जा रही है. एक एमटीएस या ऑफिस असिस्टेंट के पद के लिए कथित तौर पर दो से चार लाख रुपये तक की बोली लग रही है. सूत्र बताते हैं कि “यह एक संगठित गिरोह का काम हो सकता है, जो नौकरी के इच्छुक युवाओं की मजबूरी का फायदा उठा रहा है और संस्थान की साख को बट्टा लगा रहा है.”
बिना नोटिफिकेशन, सीधी भर्ती: नियमों की अनदेखी
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि भर्ती की कोई भी जानकारी आईआईटी बीएचयू की आधिकारिक वेबसाइट या किसी भी रोजगार समाचार पत्र में प्रकाशित नहीं की गई. सूत्रों का आरोप है कि “पोर्टल पर बिना किसी नोटीफिकेशन के ये भर्ती की जा रही है. पात्र और योग्य उम्मीदवारों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह अनभिज्ञ रखा गया है, जबकि चंद प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से नियुक्तियां की जा रही हैं.”