वाराणसी साभार :इन बूढ़ों को सहारा देने वाली पुलिस न तो इन्हें सड़क पार करा रही है, न किसी अस्पताल ले जा रही है। बल्कि पुलिस इन्हें उस जगह पहुंचाने जा रही है, जिसकी कल्पना मात्र से सामान्य लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं
चित्र में दिखाई दे रहे यह बुजुर्ग अपने किए की सजा भुगतने जेल जा रहे हैं। उसी जेल में, जहां अपने सेवा काल में इन्होंने न जाने कितने लोगों को भेजा होगा। अब जीवन की शेष सांसें वहीं कटेंगी, क्योंकि अदालत ने इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है।
इनका अपराध यह था कि इन्होंने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए एक कथित फर्जी मुठभेड़ में राजा मान सिंह की हत्या कर दी।
घटना लगभग पैंतीस वर्ष पुरानी है। उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी और शिवचरण माथुर मुख्यमंत्री थे। चुनावी विवाद के दौरान राजा मान सिंह ने सभा स्थल पर खड़े हेलीकॉप्टर में टक्कर मार दी थी। इसके बाद क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया।
चित्र में सफेद कुर्ता पहने दिखाई दे रहे तत्कालीन डिप्टी एसपी कान सिंह भाटी ने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर राजा मान सिंह की हत्या की और उसे मुठभेड़ का रूप दे दिया।
राजा मान सिंह की पुत्री ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। मुकदमा वर्षों तक चलता रहा। सैकड़ों नहीं, हजारों बार तारीखें पड़ीं, जज बदलते रहे, लेकिन न्याय की उम्मीद कायम रही। आखिरकार लगभग 35 वर्ष बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मुठभेड़ को फर्जी माना और उसमें शामिल सभी पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद तत्कालीन डिप्टी एसपी कान सिंह भाटी सहित सभी दोषी पुलिसकर्मियों को जेल भेज दिया गया।
इसलिए हमेशा कहता हूं।
ओहदा हो अगर पास तो उस पर इतराइए मत। सही और गलत का फैसला समय रहते करते जाईये।निजाम के दबाव में किया गया अन्याय, एक दिन न्यायालय के कटघरे में जरूर खड़ा होता है।वर्ष 2020 में आज ही के दिन लिखी गई यह फेसबुक पोस्ट आज भी उतनी ही प्रासंगिक प्रतीत होती है।