रवि शंकर राय की रिपोर्ट वाराणसी
वाराणसी। मनोविज्ञान विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मंगलवार को ‘एक्सपीरियंसिंग म्यूज़िक थेरेपी’ विषयक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के म्यूज़िक थेरेपी सेल एवं शोध केंद्र द्वारा आयोजित कार्यशाला के मुख्य वक्ता एरिक मेरिंग (अमेरिका) म्यूज़िक थेरेपिस्ट, प्रसिद्ध प्रारंभिक बाल संगीत शिक्षाविद्, बहु-वाद्य कलाकार तथा ‘टू लिटल ब्लैकबर्ड्स’ पद्धति के लेखक रहे। एरिक मेरिंग ने जीवन के अंतिम चरण, डिमेंशिया देखभाल केंद्रों, विद्यालयों, मनोरोग कारागारों तथा विकासात्मक अक्षमताओं से ग्रस्त विभिन्न आयु वर्ग के व्यक्तियों के साथ अपने संगीत चिकित्सा के अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि संगीत इसलिए चिकित्सकीय है, क्योंकि यह व्यक्ति को अपनी कुंठाओं, भावनाओं और आंतरिक पीड़ाओं की अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि संगीत उन लोगों के लिए भी प्रभावी होता है, जिनमें स्मृति, भाषा या सहभागिता की इच्छा का अभाव होता है, क्योंकि संगीत सीधे भावनात्मक और तंत्रिका स्तर पर कार्य करता है। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. शैफाली वर्मा ठकराल, समन्वय डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय व डॉ. मुकेश कुमार पंथ एवं आउटरीच सहयोग प्रो. संजय ने किया। इस अवसर पर प्रो. रश्मि सिंह, प्रो. संजीव कुमार सिंह, डॉ. प्रतिभा सिंह, डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव, डॉ. दीपमाला सिंह बघेल, डॉ. कंचन शुक्ला, डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा आदि उपस्थित रहे।