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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर 5 हजार साधकों ने साधा तन, मन और आत्मा का संतुलन

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विजय कुमार की रिपोर्ट

वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर माँ गंगा के पावन तट प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर योग, भक्ति और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गंगोत्री सेवा समिति एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य योग समारोह में करीब पांच हजार श्रद्धालुओं, योग साधकों और नागरिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का संकल्प लिया। सुबह की सुनहरी किरणों के बीच माँ गंगा की अविरल धारा के साक्षी बने हजारों लोग जब एक साथ योगासन, प्राणायाम और ध्यान में लीन हुए तो पूरा घाट आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। हर-हर महादेव, बाबा विश्वनाथ की जय और माँ गंगा के गगनभेदी जयघोषों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित यह विराट योग आयोजन भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बनकर लोगों के मन में विशेष छाप छोड़ गया। इस अवसर पर योगाचार्य जगदीश त्रिपाठी ने योग के गूढ़ आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन की प्रक्रिया है। उन्होंने आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के माध्यम से योग की संपूर्ण यात्रा को सरल ढंग से समझाया। कार्यक्रम में गंगोत्री सेवा समिति के महासचिव दिनेशशंकर दुबे ने अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इस दौरान संस्था के संथा प्रसाद, दिनेश सैनी और संजय सेठ मौजूद थें। अंत में आर्ट ऑफ लिविंग की शिक्षिका मोनिका अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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