वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट
वाराणसी — श्री अग्रसेन कन्या पीजी कालेज परमानन्दपुर वाराणसी परिसर में सोमवार को प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग द्वारा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत एक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. मिथिलेश सिंह ने कहा कि दिनांक 8 से 11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भव्य आयोजन किया गया जो सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनबी द्वारा किए गए प्रथम आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाया गया। यह पर्व भारतीय अस्तित्व एवं स्वाभिमान के 1000 वर्षों के संघर्ष का प्रतीक है। प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. दुष्यंत सिंह ने सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुजरात तट के प्रभात पाटन पर स्थित सोमनाथ मंदिर 12 पवित्र शिव ज्योतिर्लिंगों में एक है। यह वह स्थान भी है जहां से श्री कृष्ण भगवान ने अपनी अंतिम यात्रा प्रारंभ की थी। जब 1026 में महमूद गजनबी ने इस मंदिर को विध्वंश कर दिया था तब सोलंकी राजा भीमदेव ने पत्थर से इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। इसलिए यह मंदिर कट्टरता पर आस्था, विनाश पर सृजन तथा भारतीय संस्कृति की शाश्वतता का प्रतीक है। प्राचीन इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सरला सिंह ने इस मंदिर के सांस्कृतिक तथा बौद्धिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा यह मंदिर नागर शैली का एक प्रमुख उदाहरण है। इस मंदिर को ना जाने कितनी बार नष्ट किया गया और लूटा गया फिर भी यह मन्दिर अपने अस्तित्व को बनाए रखने में सफल रहा।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.मिथिलेश सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापित अधिष्ठाता शैक्षणिक डा.अपर्णा शुक्ला द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. मृदुला व्यास, दिव्या पाल, डा. सुमन सिंह, डा. मेनका सिंह, डा. अंजली त्यागी समेत अनेक प्रवक्तागण तथा सैकड़ों छात्राएं उपस्थित