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केंद्रीय बजट 2026–27: समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत की ओर सशक्त कदम

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कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट वाराणसी

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की आर्थिक नीतियों में निरंतरता के साथ-साथ संरचनात्मक सुधार और दीर्घकालिक विकास दृष्टि को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है। यह बजट केवल तात्कालिक राहत या लोकलुभावन घोषणाओं तक सीमित न होकर निवेश, उत्पादकता और संस्थागत मजबूती पर केंद्रित दिखाई देता है। समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अनेक ऐसे कदम उठाए हैं, जो अर्थव्यवस्था को दीर्घकाल में सुदृढ़ बना सकते हैं।इस बजट की सबसे प्रमुख विशेषता पूंजीगत व्यय पर दिया गया विशेष बल है। वित्त वर्ष 2026–27 के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर लगभग ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है। आर्थिक सिद्धांतों के अनुसार, पूंजीगत व्यय का गुणक प्रभाव अधिक होता है, जिससे रोजगार सृजन, समग्र मांग और उत्पादन में वृद्धि होती है। बुनियादी ढाँचे में निवेश से निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना रहती है, जो आर्थिक वृद्धि को गति देता है।सरकार ने विकास के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। राजकोषीय घाटे को मध्यम अवधि में नियंत्रित करने का लक्ष्य यह संकेत देता है कि सरकार ऋण-सततता और मैक्रो-आर्थिक स्थिरता को लेकर सजग है। यह दृष्टिकोण घरेलू और विदेशी निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने में सहायक होगा।विनिर्माण क्षेत्र को इस बजट में अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन माना गया है। सेमीकंडक्टर, उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों और MSME क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता और संस्थागत समर्थन बढ़ाने की घोषणा की गई है। MSME क्षेत्र, जो देश की GDP और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है, उसके सशक्तिकरण से रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित हो सकते हैं।कृषि और ग्रामीण विकास बजट का एक मजबूत स्तंभ बने हुए हैं। किसान ऋण, ग्रामीण अवसंरचना और रोजगार योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण मांग को बनाए रखने का प्रयास किया गया है। चूँकि भारत की बड़ी आबादी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर है, इसलिए यह दृष्टिकोण समावेशी विकास के लिए अनिवार्य है।बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा को दीर्घकालिक विकास की आधारशिला के रूप में देखा गया है। स्वास्थ्य अवसंरचना, चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास पर निवेश से मानव पूंजी की गुणवत्ता में सुधार की अपेक्षा है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था की स्थायी प्रगति के लिए आवश्यक शर्त है।इसके अतिरिक्त, हरित प्रौद्योगिकी, कार्बन कैप्चर (CCUS), डिजिटल रचनात्मक अर्थव्यवस्था, महिला उद्यमिता और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी पहलों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर नीतियाँ बना रही है।कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 को लोकलुभावन के बजाय नीति-आधारित और विकासोन्मुख बजट कहा जा सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी प्रभावशीलता और पारदर्शिता से किया जाता है। यदि ऐसा होता है, तो यह बजट भारत को एक आत्मनिर्भर, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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