सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां नगर कस्बा बाजार स्थित शाही जामा मस्जिद में शुक्रवार(जमा) के दिन तकरीर पेश करते हुए। मौलाना तनवीर रजा ने बताया कि पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म का दिन (12 रबीउल अव्वल, लगभग 570 ईस्वी) उनके परिवार और पूरी मानवता के लिए बेहद आनंद और उम्मीद का दिन था। उन्होंने बताया कि दादा की खुशी ठिकाना नहीं रहा। कि पैगंबर साहब के दादा अब्दुल मुत्तलिब अपने पोते के जन्म की खबर सुनकर बेहद प्रसन्न हुए थे। नवजात शिशु को लेकर तुरंत काबा गए और शुकराना नमाज में अल्लाह का शुक्रिया अदा किया।
तनवीर रजा ने कहा कि उस समय अरब समाज में अज्ञानता और कुप्रथाएं थीं। लेकिन उनके आगमन को मानवता के लिए एक नई रोशनी और मार्गदर्शन के रूप में देखा गया। रजा ने अपने तकरीर में बताया कि पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब का जन्म (12 रबीउल-अव्वल, सन 570 ईस्वी) मानवता के लिए अत्यंत आनंद, प्रकाश और रहमत (दया) का दिन माना गया है। इस्लामिक मान्यताओं और सीरत (इतिहास) के अनुसार, पैगंबर साहब के दुनिया में आने से चारों तरफ आध्यात्मिक शांति और सुकून फैल गया था। आप के जन्म की रात को बेहद पवित्र, महान और प्रकाशमान माना गया है। जिसे मार्गदर्शन और उजाले के आगमन के रूप में याद किया जाता है। उनके दादा अब्दुलमुत्तलिब अपने पोते के जन्म से अत्यंत प्रसन्न हुए थे। और उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए जश्न मनाया था। मिलाद-उन-नबी: इस मुबारक दिन को दुनिया भर के मुसलमान मिलाद-उन-नबी या ईद-ए-मिलाद के रूप में मनाते हैं। उक्त मौके पर प्रकाश और जुलूस के साथ मस्जिदों और गलियों को सजाया जाता है। और शांति व भाईचारे का संदेश देने वाले जुलूस निकाले जाते हैं। सेवा और दान किया जाता है। गरीबों को खाना खिलाना, दान देना और उनके बताए हुए नेकी और सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है।